hirdesh parihar dhorra
Sunday, 19 November 2017
Saturday, 19 August 2017
Friday, 22 July 2016
orchaa kilo ka shahar
किलों का हसींन शहर :ओरछा
*************;;;;;***************;;;;;***************;;;******20,07,2016
(हिरदेश परिहार धौर्रा)
ओरछा का शाब्दिक अर्थ है गुप्त स्थान। झाँसी से 16 किमी की दूरी पर मध्यप्रदेश में स्थित है ओरछा। पहाड़ों की गोद में स्थित ओरछा एक समय बुंदेलखण्ड की राजधानी हुआ करता था। ओरछा में कदम रखते ही ऐसा प्रतीत हुआ जैसे कि इतिहास के उन पन्नों में खो गई हूँ जहाँ सैनिक अस्त्र-शस्त्र लेकर महल में खड़े हुए हैं। चारों ओर संगीत की मधुर धुन दरबारियों को मंत्र मुग्ध कर रही हैं। रानियाँ परदे के पीछे से दरबार को देख रही हैं। राजा दरबारियों के साथ अपनी बैठक में विराजमान हैं।
आजकल न राजा रहे और न रंक, केवल उनकी स्मृतियाँ रह गई हैं। आज उनके महल सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहे हैं। ओरछा की विरासत यहाँ के पत्थरों में कैद है। आने वाली पीढ़ियों को यहाँ की महान धरोहर से परिचित होना आवश्यक है।
वास्तुकला के प्रतीक, बुंदेलखन्ड राज्य के महल, किले, पवित्र भव्य मंदिर तथा इस राज्य के संस्कृति से जुड़ी प्रतिमा, चित्रकला आप यहाँ पर देख सकते हैं। ओरछा की नींव बुंदेला राजपूत सरदार रुद्र प्रताप ने डाली थी। ओरछा में प्राय: भीड़ कम दिखाई देती है। यहाँ पर पर्यटक आसानी से टहल सकते हैं। शहर में स्थित राजाओं के महल तथा तत्कालीन मंदिर अभी भी नवीनतम लगते हैं।
ओरछा की सुंदरता को देखकर हम इसे अपने कैमरे में कैद किए बिना नहीं रह सकते। किले, वास्तुकला को दर्शाते बुंदेलखण्ड के महल, भव्य मंदिर तथा छतरियाँ इस नगरी के पौराणिक महत्व को दर्शाती हैं।
बीर सिंह डियो ने जहाँगीर के महल का निर्माण किया था। बुंदेलखण्ड की सुंदर आकृति के द्वार मुख्य आकर्षण का केन्द्र हैं। राय परवीन महल का निर्माण राजा इन्द्रमहल ने करवाया था। कवयित्री राय परवीन के लिए जिनसे राजा बहुत ही प्रभावित थे, सन 1800 में शीश महल का निर्माण किया गया था अब यह एक हैरीटेज होटल के रूप में जाना जाता है।
महलों के साथ-साथ पर्यटक यहाँ पर हवेलियाँ देख सकते हैं। दाउजी की हवेली प्रमुख है। मंदिरों में चतुर्भुज मंदिर तथा लक्ष्मीनारायण मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध हैं। लक्ष्मीनारायण मंदिर की सुंदर आकृतियाँ ओरछा रूप को दर्शाती हैं तथा चतुर्भुज मंदिर आकार में अन्य मंदिरों से सबसे बड़ा है। यदि पर्यटक यहाँ की ओरछा संस्कृति से परिचित होना चाहते हैं तब बेतवा नदी पर स्थित ओरछा की छतरी देख सकते हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने अपने जीवन के अंतिम दिन इसी स्थान पर बिताए थे। उनकी अस्थियाँ इस पवित्र स्थल पर आज भी शहीद स्मारकों के रूप में सुरक्षित हैं। यदि पर्यटक ओरछा से कलात्मक वस्तुएँ खरीदना चाहते हैं तो यहाँ के बाजारों में डोकरा की धातु से बनी वस्तुएँ मिलती हैं।
छतरियाँ ओरछा इतिहास का एक अभिन्न अंग हैं। ओरछा में राजाओं की स्मृति में बनी चौदह छतरियाँ हैं जो कि बेतवा नदी के किनारे कंचनघाट पर स्थित हैं। मुख्य रूप से गुम्बद तथा घुमावदार आवर्त इन छतरियों निर्मित किए गए हैं। चौदह छतरियों में बुंदेलखण्ड के राजा-महाराजा के अस्तित्व बसे हुए हैं।
ओरछा की सुंदरता को देखकर हम इसे अपने कैमरे में कैद किए बिना नहीं रह सकते। किले, वास्तुकला को दर्शाते बुंदेलखण्ड के महल, भव्य मंदिर तथा छतरियाँ इस नगरी के पौराणिक महत्व को दर्शाती हैं।
आप किस तरह वहाँ पहुँच सकते हैं-
वायु मार्ग से - ओरछा के सबसे नजदीकी हवाई अड्डे हैं ग्वालियर तथा खजुराहो।
रेल - ओरछा से सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन झाँसी है। दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-चेन्नई राजमार्ग झाँसी से गुज़रता है।
सड़क मार्ग -झाँसी, खजुराहो, दिल्ली, ग्वालियर, आगरा, भोपाल से ओरछा के लिए बस सेवाएँ उपलब्ध हैं।
Thursday, 21 July 2016
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